इस संदर्भ में जब हमने हापुड़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि दस हज़ार रुपये में सौदे की बात जो सामने आई है
उसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं है.
यशवीर सिंह बताते हैं कि पुलिस ने गीता द्वारा बताए गए अलग-अलग रेप की घटनाओं की जांच करवाई है लेकिन ऐसी कोई
भी बात अभी तक प्रमाणित नहीं हुई है.
जब हमने यशवीर सिंह से पूछा कि क्या यह आरोप सही है कि गीता की एफ़आईआर नहीं लिखी गई थी तो उन्होंने
बताया कि पूर्व में गीता के ख़िलाफ़ भी कई मामले आए हैं और ख़ुद गीता ने भी
कई बार अलग-अलग लोगों पर एफ़आईआऱ दर्ज करवाई है. लेकिन दोनों ही प्रकरण
जांच के बाद झूठे पाए गए.
हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि मामला संदिग्ध है और अभी भी जांच के दायरे में है.
गांव वालों की प्रतिक्रिया
जिस
वक़्त हम श्यामपुरजट्ट गांव पहुंचे, गांव लगभग ख़ाली था. एक गुमटी पर कुछ
लोग मौजूद थे जिनसे हमने गीता-विनोद-भुवन के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले तो बात करने से इनक़ार दिया लेकिन पहचान ज़ाहिर न करने का आश्वासन
देने पर बात की.
इस संदर्भ में जब हमने हापुड़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि दस हज़ार रुपये में सौदे की बात जो सामने आई है
उसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं है.
यशवीर सिंह बताते हैं कि पुलिस ने
गीता द्वारा बताए गए अलग-अलग रेप की घटनाओं की जांच करवाई है लेकिन ऐसी कोई
भी बात अभी तक प्रमाणित नहीं हुई है.
जब हमने यशवीर सिंह से पूछा कि क्या यह आरोप सही है कि गीता की एफ़आईआर नहीं लिखी गई थी तो उन्होंने
बताया कि पूर्व में गीता के ख़िलाफ़ भी कई मामले आए हैं और ख़ुद गीता ने भी
कई बार अलग-अलग लोगों पर एफ़आईआऱ दर्ज करवाई है. लेकिन दोनों ही प्रकरण जांच के बाद झूठे पाए गए.
हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि मामला संदिग्ध है और अभी भी जांच के दायरे में है.
गांव वालों की प्रतिक्रिया
जिस
वक़्त हम श्यामपुरजट्ट गांव पहुंचे, गांव लगभग ख़ाली था. एक गुमटी पर कुछ लोग मौजूद थे जिनसे हमने गीता-विनोद-भुवन के बारे में पूछा तो उन्होंने
पहले तो बात करने से इनक़ार दिया लेकिन पहचान ज़ाहिर न करने का आश्वासन
देने पर बात की.
मार्च 2014: "हमारा अभियान स्पष्ट है, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए."
अगस्त 2015: "बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देना मोदी सरकार का धोखा."
अगस्त 2016: "जब तक बिहार जैसे पिछड़े राज्य को विशेष दर्जा नहीं दिया जाएगा, राज्य का सही विकास संभव नहीं है."
अगस्त 2017: "पीएम मोदी के मुकाबले कोई नहीं", पार्टी ने इस दौरान विशेष दर्जा के मुद्दे पर अघोषित चुप्पी साधी!
मई 2019: "ओडिशा के साथ-साथ बिहार और आंध्र प्रदेश
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के मुद्दे पर नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का स्टैंड पिछले पांच सालों में कुछ इस तरह
बदला है.
इस दौरान बिहार की सत्ता पर नीतीश कुमार ही काबिज़ रहे, हालांकि केंद्र में सरकारें बदलीं और राज्य में उनकी सरकार के सहयोगी भी.
संयोग
यह रहा कि जब भी जदयू विशेष दर्जा के मुद्दे पर आक्रामक हुई, केंद्र और राज्य में अलग-अलग गठबंधन की सरकारें रहीं और जब दोनों जगहों पर एनडीए की
समान सरकार बनी तो पार्टी ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली.
अब लोकसभा चुनाव के छह चरण बीत जाने के बाद पार्टी ने एक बार फिर से राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने का राग अलापा है.
जदयू
के महासचिव और प्रवक्ता केसी त्यागी ने इस बार बिहार के साथ-साथ ओडिशा और
आंध्र प्रदेश को भी विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है.
उन्होंने
सोमवार को एक बयान जारी कर कहा, "साल 2000 में बिहार के विभाजन के बाद
राज्य से प्राकृतिक संसाधनों के भंडार और उद्योग छिन गए. राज्य का विकास
जैसे होना चाहिए था, नहीं हुआ. अब समय आ गया है कि केंद्रीय वित्त आयोग इस
मुद्दे पर फिर से विचार करे."
फ़िलहाल केंद्र और राज्य में समान
गठबंधन की सरकार है और लोकसभा चुनाव चल रहे हैं. ऐसे में जदयू के इस बयान
से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे
हैं.
19 मई को अंतिम चरण में बिहार की आठ सीटों पर मतदान होने हैं.
और नीतीश कुमार के विरोधियों का कहना है कि वो एक बार फिर पलटी मारने की
तैयारी कर रहे हैं.
वहीं जानकार इसे "सुविधा की राजनीति" के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि जदयू इन सभी अशंका और आरोपों को खारिज कर रही है और
भाजपा के साथ अपने रिश्ते को कायम रखने की प्रतिबद्धता जता रही है.
केसी त्यागी ने बीबीसी से कहा कि वे ओडिशा के साथ-साथ आंध्र प्रदेश को भी विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के समर्थक हैं, जिसकी हालत बंटवारे के बाद बिगड़ गई और जगनमोहन रेड्डी के विशेष राज्य के दर्जे की मांग का भी
समर्थन करते हैं.
हाल ही में फणी तूफ़ान ने ओडिशा को काफी नुकसान
पहुंचाया, इसके बाद वहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्र से राज्य को
विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई.
वहीं, आंध्र प्रदेश में
सत्ताधारी तेलुगू देशम पार्टी और विपक्ष के नेता जगनमोहन रेड्डी भी राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग पहले से करते रहे हैं.
इसी मुद्दे
पर पिछले साल मार्च के महीने में तेलगू देशम पार्टी केंद्र में एनडीए गठबंधन से अलग हो गई थी जो कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर से ही एनडीए के साथ रही थी.
केसी त्यागी के इस बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए एक बार फिर पलटी मारने की आशंका जताई है.
पार्टी
प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बीबीसी से कहा, "जनता के मन में जो संशय हैं,
उसकी पृष्ठभूमि तैयार हो रही है. पलटी मारना नीतीश कुमार की फितरत है, उन्हें इसका अनुभव प्राप्त है. जदयू को लग रहा है कि देश में भाजपा की
सरकार नहीं लौटने वाली है, इसलिए वो यह मुद्दा उठा रहे हैं."
नवंबर
2015 में बिहार में जदयू ने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य में तीसरी बार सरकार बनाई थी. जुलाई 2017 में जदयू ने आरजेडी का साथ छोड़ एनडीए में
फिर से आने का फ़ैसला किया था तब से इस मांग को लेकर वो ख़ामोश थी.
चुनाव के आख़िरी चरण में जदयू की इस मांग को नीतीश कुमार की दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.
जानकारों
का मानना है कि विशेष राज्य के मुद्दे को फिर से उठना भाजपा को असहज
स्थिति में डाल सकता है क्योंकि पार्टी के बड़े नेता और वित्तमंत्री अरूण जेटली पहले ही विशेष दर्जे की मांग को ख़ारिज करते हुए कह चुके हैं कि ऐसी
मांगों का दौर समाप्त हो चुका है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजद
का आरोप सही साबित होगा और जदयू भी टीडीपी की राह चलेगी, इस सवाल पर केसी
त्यागी कहते हैं, "हम भाजपा के साथ गठबंधन भी रखेंगे और अपनी मांग भी जारी
रखेंगे. हमारी यह मांग बहुत पुरानी है. 2004 से यह मांग हम कर रहे हैं. नया प्रसंग नवीन पटनायक के बयान के बाद शुरू हुआ है, हमने अपनी मांग को सिर्फ़
दोहराया है."
लेकिन भाजपा अब आपकी सहयोगी है, फिर क्यों नहीं मिला विशेष राज्य का दर्जा, इस सवाल का जवाब केसी त्यागी थोड़ी खीझ के साथ देते
हैं, "अभी चुनाव चल रहा है, आप कैसी बात कर रहे हैं कि जैसे आज हमने मांग
उठाई और कल को दर्जा मिल जाएगा. ज़रूरी नहीं है कि हर मांग मानी जाए,
ज़रूरी नहीं है कि हम हर मांग को उठाना छोड़ दे."
को भी मिले विशेष राज्य का दर्जा."
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